Thursday, 15 April 2021

पुरुष:

सावधान : अगर आप “ हनी ट्रैप” ,”एक्स्टॉरशन मनी” ,और “ मोडेस्टी ऑफ वुमन “ के नाम चल रहे गोरख धंधों ,सरीखे संजीदा ,सामयिक और पुरुष जाती के लिए घातक होते जा रहे न्यायलयों पर कुछ सुनना और पढ़ना पसंद नहीं करते तो ये लेख आपके लिए नहीं है।लेकिन आप अगर इस नए खतरे, जो आपके परिवार,सामाजिक प्रतिष्ठा और आपकी कमाई पर भयंकर चोट कर सकता है,के बारे में जानना चाहते हैं तो फिर ये लेख पढ़िए,कॉपी पेस्ट करिए और इसे शेयर करिए।मैंने लेख में वही शब्द इस्तेमाल करे हैं जो मुझे बताए गए इसलिए आप शब्दों से विचलित हो सकते हैं। घटना के वास्तविक पात्रों को मैंने बदल दिया है, ताकि उनकी पहचान सार्वजनिक ना हो। 
 अमेजॉन फायर टी वी पर नई जोड़ी गई फिल्मों को निहार रहा था। अक्षय खन्ना अभिनीत फिल्म “ सेक्शन 375” पर नजर पड़ी।कभी सुना नहीं था इस फिल्म के बारे । शाम को अकेला था और कोई नई फिल्म देखने को मिल नहीं रही थी इसलिए उसे ही देखने बैठ गया।फिल्म का पूरा कंटेंट जबरदस्त है।आपको देखनी चाहिए।स्त्री वादी होती जा रही न्यायिक व्यवस्था पर भयंकर चोट करती फिल्म है। सहमति से बने शारीरिक सम्बन्धों को किस तरह से बलात्कार बना अदालत मैं घसीटा जाता और फिर आउट रेज ऑफ मॉडेस्टी ऑफ वूमेन के नाम पर सारे सबूतों को दर किनार कर पुरुष को ही दोषी करार दिया जाता क्यूंकि स्त्री का सिर्फ कहना कि उसका रेप हुआ है पुरुष को दोषी करार देने में काफी है । फिल्म देख के मैं विचलित हुआ।
नवोदय विद्यालय पण्डोह में पड़ी कुछ अच्छी आदतों में से एक आदत मेरी ये भी है कि विचलित होने पर आइने के सामने खड़ा हो कर मैं अपनी छवि की आंखो में आंखे डाल कर अपने को तोलता हूं ।अपने आप से बात करना मुझे हमेशा नई ऊर्जा देता है। मैं आइने के सामने जा खड़ा हुआ। अपने प्रतिबिंब की आंखो में आंखे डाल मुझे महसूस हुआ कि ऐसा तो किसी भी पुरुष के साथ हो सकता।मेरे साथ भी।विचलित हुआ।इसी विचलन से मुझे ये लेख लिखने को प्रेरित किया। 
 पालमपुर में अपने आशियाने में शाम का भोजन बनाने की सोच रहा था।मुझे कूकिंग का जबरदस्त शौक है।बड़े दिनों बाद बिरयानी बनाने का मूड था।
अचानक मोबाइल बजा।स्क्रीन पर राजू का नाम देख अच्छा लगा।चार पांच महीने से राजू से बात नहीं हुई थी।वैसे राजू वो हमारे लिए है।दुनिया के लिए वो डॉक्टर राज कुमार हैं।गणित के धांसू छात्रों और शिक्षकों में से एक।विश्वविद्यालय में अपने बैच के गणित एम एस सी के गोल्ड मेडलिस्ट, तीसरे सेमेस्टर में ही नेट परीक्षा निकालने और दो साल से भी कम समय में पी इच डी पूरा करने के कारनामे उनके नाम दर्ज हैं।कॉलेज में गणित के प्रोफेसर है और जो सम्मान वो अपनी अद्भुत अध्यापन शेली और जबरदस्त मेहनत से हासिल कर पाए वो बिरलों को ही हासिल हो पाता है। 
 हलकी मुस्कुराहट के साथ मैंने फोन उठाया,” राजू भाई की जय हो।“ दूसरी तरफ से कोई आवाज नहीं आई।मैंने फिर कहा,” राजू भाई की दो बार जय हो।“ इस बार हलकी घरघराहट के साथ आवाज सुनाई दी” हल्लो सचिन” राजू अपनी दमदार आवाज के लिए जाना जाता है।विश्व विद्यालय के खांटी वाम छात्र संगठन की सबसे दमदार और भारी आवाज।जब वो क्रांति चौक पर भाषण दिया करता था तो दुकानदार तक उनके संबोधन को सुनने बाहर निकल आते थे।मैंने वाइस चांसलर साहब को भी राजू का भाषण सुनते हुए देखा है।
 फोन पर इस क़दर कमजोर आवाज की कतई आशा नहीं थी।मैंने अपने परिचित हास्य अंदाज में पूछ लिया,” भाई ,क्या हुआ।भाभी के हाथ का खाना नी मिल रहा आजकल तो कमजोरी आ गई।अब वामपंथी बने रहना तो सरकार क्यूं आपको आपके घर के आस पास रखेगी ,पटक दिया ना घर से दो सौ किलो मीटर दूर।कोई ना।खाना पूरा खाना।देसी घी भी ।ट्रांसफर से हमारे इलाके बदलते हैं,इरादे थोड़ी। “ दूसरी तरफ से कोई आवाज नहीं आई।आम तौर पर मेरी गप्पों पर राजू भयंकर अट्टहास करता है।वास्तव में विश्व विद्यालय में मेरी और राजू की बेहद निकटता का कारण ही मेरी व्यंगात्मक शेली थी। मुझे चिंता हुई। 
 मैंने फिर पूछा,” राजू, सब ठीक है ना भाई।“ अब भरराई हुई आवाज सुनाई दी,” नहीं सचिन, सब ठीक नहीं है।कुछ गलत हो गया है।इससे पहले कि कुछ घातक हो जाए मैं उन सब लोगों को फोन कर के माफी मांग रहा हूं जो मेरे लिए जीवन में महत्वपूर्ण है।मुझे माफ़ कर देना मेरे भाई,मेरी वजह से आप सब को शायद नीचा देखना पड़े।“ आवाज में जबरदस्त टेंशन और बेहद पीड़ा साफ दिख रही थी। 
 मेरी आंखों कि पुतलियां चौड़ी हो गई।कम से कम राजू से मुझे इस बात की आशा नहीं थी।हम में से कइयों के लिए वो प्रेरणा था। मैं उसके कितने छात्रों और छात्राओं को जानता हूं जो सार्वजनिक तौर पर इस बात को स्वीकार करते हैं कि प्रोफेसर साहब ने हमारी जिंदगी,हमारी सोच समझ को बदल डाला। 
मैंने फिर पूछा,” हुआ क्या?” ।कोई आवाज नहीं आई।
मैंने फिर पूछा, “ कम ऑन यार, वी आर फ्रेंड्स ना। बिंदास बताओ।“ दूसरी तरफ से सांसों का वेग बता रहा था कि राजू भयंकर पीड़ा में हैं।कुछ देर बाद आवाज आई,” बताने लायक नहीं है सचिन।बस ऐसा समझ ले के मेरा परिवार,मेरा सोशल रेपुटेशन,मेरा कैरियर सब कुछ स्टेक पर है।“ अब मुझे चिंता हुई।“ कम ऑन यार।खुल के बताओ।अभी तुम्हारे दोस्त जिंदा हैं।ऐसी तैसी साले किसी कि “
 राजू बेहद पीड़ा में था। भर्राई आवाज में बोला,” आई एम् ट्रेप्ड यार ।“ 
मैं चिंतित था,” खुल के बताओ राजू ।जो भी है।देखते हैं ,क्या कर सकते।तुम परेशान हो।सोच नहीं पाओगे।इसलिए मुझे बताओ।मै सोचता कि क्या कर सकते।“ 
राजू बेहद डरा हुआ था।बेहद विचलित आवाज में बोला,” आई एम् सेक्सुअली ट्राप्ड यार। वी कैन टॉक ऑन दिस इश्यू ना।“ 
मैंने कहा,” श्योर यार।अब बूढ़े हो गए हम और समझदार भी।बिंदास बताओ। पुरुष को सेक्सुअली ट्रैप करना बेहद आसान है। हमें प्रकृति ने ऐसा बनाया है ।“ अपने बिज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ मैंने राजू को सहज करने की आखिरी कोशिश करी ,” बायोलॉजिकल लाइफ का विज्ञानीक अर्थ होता है,की हम अपने जैसे कितने पैदा कर सकते।मरी हुई चीजें प्रजनन नहीं करेंगी।और लाइफ को आगे बढ़ाने के लिए प्रकृति ने चीजें सेक्सुअल बनाई है।पुरुष और स्त्री बनाई।सेक्सुअली पुरुष को प्रकृति ने एक्टिव बनाया क्यूंकि हमें स्पर्म देने हैं।तू भी ले तू भी ले।स्त्री पैसिव है क्यूंकि उसी को जीव धारण करना है और उसे पैदा करना है।इसलिए वो सेलेक्टिव है।वूमेन नीड रीज़न फॉर सेक्स।वो कुछ भी हो सकता।इमोशंस, लगाव, मजबूरी या पैसा। व्हाइल वूमेन नीड ए रीज़न , मेन ऑनली नीड स्पेस।मेरा तो ये भी मानना है कि मैरेज इज द प्राइस मेन पे फॉर सेक्स एंड सेक्स इज द प्राइस वूमेन पे फॉर मैरिज।“ 
 राजू अब थोड़ा सहज हुआ,” मुझे ट्रैप किया गया यार।कोई पांच महीने पहले मुझे फेसबुक पर एक अनजान महिला की फ्रेंड रिक्वेस्ट आई।मेरे क्षेत्र का नाम लिखा था प्रोफ़ाइल में तो मैंने अक्सेप्ट कर ली।कुछ दिनों बाद उसने फेसबुक मैसेंजर पर गुड मॉर्निंग मेसेज छोड़ा।दिन के समय में मैंने भी रिप्लाइ कर दिया।इसके बाद उसने चैट करना शुरू कर दिया।मुझे बताया कि आपकी ट्रांसफर से यहां के कॉलेज के छात्र बहुत दुखी हैं।कहते कि सर के जाने के बाद मैथ्स का कुछ समझ नी आता।कॉलेज जाने का दिल नहीं करता।मुझे लगा कि शायद महिला मेरी जानकर है या किसी छात्र की रिश्तेदार इसलिए मैंने भी रिप्लाइ कर दिए कि ट्रांसफर से बंधे होते कर्मचारी,फ्लान फलां। चैट चलती रही।कुछ दिनों बाद उसने मुझे बताया कि आप मेरे रिश्तेदार हो।आपकी दादी मेरी मम्मी की मौसी हैं। मुझे थोड़ा अपनत्व महसूस हुआ।महिला ने बातों बातों में मुझसे मेरा वॉट्सएप नंबर भी ले लिया।मुझे कुछ खास महसूस नहीं हुआ क्यूंकि मैं हज़ारों लोगों से फेसबुक और व्हाट्स ऐप पर इंटरैक्ट करताहूं । एक दिन महिला का फोन आया। हाय हल्लो ।फिर अंतराल पर लगातार फोन आने लगे। ऐसे ही एक कॉल के दौरान महिला ने मुझे बताया कि उसके पति आर्मी में बड़े ऑफिसर हैं।उन्होंने काफी पैसा कमाया है।शिमला , चंडिगड़ और दिल्ली में उनके अपने फ्लैट है।मुझे अच्छा लगा।इतनी अमीर महिला आपको कॉल कर रही आपको अपने में ही अच्छा लगता।मैंने भी शायद एक दो बार हाल चाल पूछने को कॉल कर दी होगी।महिला ने मुझे अपने दो अन्य नंबर भी दिए।उसमे से एक उसकी बेटी का था।उसने बताया कि ये नंबर सिर्फ बेटी के पिता के पास है ।अगर मेरा फोन बन्द मिले तो इस नंबर पे कॉल कर लेना। एक दिन उसका कॉल आया। चिंतित थी बोली,” की मेरे पति ने मुझे 6 लाख रुपया दिया था।उसमे से तीन लाख रुपया मैंने अपने किसी मित्र को दे दिया है जो उसे अब वापिस नहीं कर रहा। मित्र शिमला जिला के किसी हिस्से में बिजनेस करता है इसलिए उस तक पहुंचना भी आसान नहीं है। मुझे पैसों की सख्त किल्लत है।मुझे 25 हजार रूपए चाहिए जो में आपको अगले हफ़्ते लौटा दूंगी।“ 
"मुझे लगा कि मुझे सहायता करनी चाहिए।परंतु महीने के आखिरी दिन चल रहे थे। बिट कॉइन का नया नया भूत चडा था तो मैंने अपनी कुल बैंक बेलेंस कि पूंजी बिट कॉइन खरीदने में लगा दी थी।जी पी एफ तो मैं निकालने से रहा। खैर मैं कॉलेज गया।फीस क्लर्क से पूछा कि चेस्ट में कितना पैसा है।दुर्भाग्य से वहां भी पैसा नहीं था।मैंने महिला को कॉल करा की अभी तो कुछ जुगाड नहीं कर पाया परंतु पहली तारीख पे मिलने पर देखता हूं कि आपकी क्या सहायता कर पाता। महिला ने अब वीडियो कॉल करना शुरू कर दिए।चूंकि अपने गृह क्षेत्र से कोई 300 किलो मीटर दूर हूं।घर में बूढ़े मा बाप ।बेटी एमिटी यूनिवर्सिटी दिल्ली में पढ़ रही, बेटा श्रीराम कॉलेज चेन्नई से बी टेक कर रहा तो श्रीमती जी घर पे ही रह रही मा पिताजी की देख भाल करने को।अकेला रहता हूं यहां तो कोई महिला वीडियो कॉल कर दे तो उसमे समस्या तो कोई नहीं।“ ये बता मित्र ने विराम लिया।
राजू की आवाज में भय का जबरदस्त मिश्रण था। विराम के बाद राजू ने आगे बताया,” आई एम् एन आर्डिनरी मेन सचिन। हू नीड एवरीथिंग वॅट इज नीडेड बाय एन आर्डिनरी मेन। आई हैव माय बायोलॉजिकल नीड्स। बिफोर स्लीप आई युज टू मस्टर्बेट एंड टू फेंटे साइज़ माय सेल्फ आई यूज टू वाच पोर्न मूवीज।“ ये कह कर राजू चुप हो गया।
 मैंने राजू को सहज करते हुए कहा,” इसमें कोई समस्या नहीं।लगभग हर पुरुष ऐसा करता है । हां बात करने में हिचकिचाते जरूर है।हमारी परवरिश ऐसे माहौल में हुई है।भगवान शब्द का उच्चारण करते हैं कभी शब्दकोश में “भग” और “ वान” शब्दो के अर्थ देखे नहीं। योनि की आकृति पर रखे शिव लिंग पर पानी, दूध और तीन पतियों वाले भेल पत्ते चड़ाते जरूर हैं ,उनका विज्ञानिक पहलू कभी समझा नहीं। डरो नहीं।राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने अपनी जीवनी “ माय एक्सपेरिमेंट विद ट्रुथ” में लिखा है कि जब उनके पिता मरना आसन पर थे तो वो बगल के कमरे में दरवाजा बन्द कर मैथून कर रहे थे।तो जब राष्ट्र पिता इस मुद्दे पर इमानदार हो सकते तो आपको कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। “ 
राजू अब सहज था, बोला,” महिला ने ऐसे ही समय रात के दस बजे मुझे वीडियो कॉल करा।वो बिना शर्ट के थी।बोली कि कुछ भी बात मत करना ।मेरी मा साथ सो रही तो आवाज से उठ जाएगी।लिखो की क्या करूं मैं। वासना जब आपके शरीर पर हावी होती तो दिमाग काम करना बन्द के देता।मैंने भी लिखना शुरू कर दिया।शो मी दिस,शो मी देट।शायद कुछ और एरोटिक बातें भी मैंने लिखी हों।उसने वो सब किया को मैंने कहा।वो भी जो मैंने नहीं कहा। हां कुछ स्क्रीन शॉट मैंने ले लिए ताकि फिर कभी अपने को फेंटे साइज़ करने के काम आ सकें। उसके बाद मैं निढाल हो के सो गया।शनिवार को मुझे घर आना था। मैं सारी वॉट्सएप और मैसेंजर चैट डिलीट कर के घर जाता हूं इसलिए सब कुछ डिलीट कर दिया। एक तारीख को बेटी का फोन आया।उसे किसी समर स्कूल में जाना था तो पचास हजार रुपए उसे भेजने पड़े। महिला को कॉल करा की ये समस्या खड़ी हो गई इसलिए चाह कर भी उसकी सहायता नहीं कर पा रहा। चार पांच दिन बाद मै कॉलेज में अपना लेक्चर ख़तम कर क्लास से बाहर निकला तो मुझे मेरे गृह क्षेत्र के किसी नंबर से फोन आया कि आपके खिलाफ किसी महिला ने फेसबुक पर अश्लील बात करने की शिकायत की है,आप थाने आइए और इस समस्या को सुलझाइए।पहले मुझे मजाक लगा।फिर भी मैंने अपने कजिन को फोन के सम्बन्ध में बताया और पता करने को कहा।कजिन ने पता करके बताया कि वाकई शिकायत है।महिला का नाम भी बताया। वही महिला थी। मैंने फोन घुमाया।महिला ने मुझे बताया कि उसके पति ने वो चैट पढ़ ली थी और उसी के दवाब में मैंने ये शिकायत करी की आगे से ऐसी कोई चैट ना हो।आप इस तारीख को पुलिस थाने आ जाना।मुझे ग्लानि महसूस हुई।मुझे लगा कि मेरी वजह से पता नहीं बेचारी को क्या सेहना पड़ रहा।मैंने भी तय किया कि महिला के पति से माफी मांग लूंगा और आगे से कोई चैट ना करने का भरोसा दिला के वापिस आ जाऊंगा। नीयत दिवस को मैं थाने पहुंच गया। माफी मांग कर बात ख़तम कर आगे बढ़ने की बात दिमाग में थी।परंतु वहां कुछ और ही था।महिला के साथ ना उसका पति था ना कोई और रिश्तेदार।दो तीन लोग थे जिनमें से एक कानून का जानकार होने का दावा कर रहा था। मैंने उन सब से माफी मांगी और आइंदा से ऐसी कोई चैट ना करने का आश्वासन भी दिया। मैं हैरान रह गया जब महिला ने अपनी शिकायत वापिस लेने के लिए दो लाख रुपए लेने की मांग की। पुलिस के अधिकारी ने मुझे समझौता करने की सलाह दी।समझौता ना होने की स्थिति में एफ आई आर होने की बात कही और प्रिंट मीडिया में खबर छपने कि बात कही।" 
'मेरी समझ में नहीं आया कि समझौता क्या करना है।किस बात का करना है। दो वयस्क लोग आपस में इंटरैक्ट कर रहे थे वो भी सहमति से।इसमें कानूनी रूप से गलत क्या है? मैं वहां से वापिस चला आया।मुझे पता चला कि ये महिला इस तरह की सेंकड़ों घटनाओं को अंजाम दे चुकी हैं।शहर के कई नामी नाम इसके शिकार हो चुके हैं। हां मुझे शर्मिंदगी जरूर महसूस हुई की ये मैं क्या कर गया था। अखबारों में खबर लगने के बाद की स्थिति से में डर गया।परिवार, कैरीयर,सोशल स्टेट्स सब कुछ खतरे मे है। टेंशन इतनी है कि कई दिनों से सो भी नहीं पा रहा हूं।किसी को कुछ बता भी नहीं पा रहा हूं।सोचा तुम शायद समझोगे,इसलिए तुझे फोन करा….” ये कहते कहते राजू फोन पर रो पड़ा।
 मैं स्तब्ध था।मुझे राजू पर गुस्सा आया।उसे अपराधी समझ लिया।मैने गुस्से से कहा,” मैं तुझे थोड़ी देर में फोन करता” और फोन काट दिया।राजू ऐसा कर रहा।कल को अखबार में ख़बर लगेगी।हम सब भी सवालों के घेरे में आएंगे।मैंने फेसबुक पर राजू को अनफ्रेंड करने की सोची। वॉट्सएप पर ब्लॉक करने की भी।यहां तक कि उसके नंबर डिलीट करने की भी। 
बिरयानी बनाने का समय निकल रहा था। मैं खड़ा हुआ।आइने के सामने।अपनी आंखो में घूरा।आंखे बन्द की।अब मेरे दिमाग में बहुत कुछ घूमने ल गा। मैं सहज हुआ। राजू कहीं भी गलत नहीं था।वो कमजोर होती पुरुष की न्यायिक स्थिति का शिकार होने जा रहा था।मेरे सामने अपने विभाग के बहुत सारे किस्से घूम रहे थे।छात्राओं के साथ आपत्ति जनक चैट के नाम पर सस्पेंड हुए शिक्षक,छात्राओं को अश्लील मैसेज भेजने वाले शिक्षकों की खबरें,महिला अध्यापकों द्वारा छेड़खानी के आरोप लगने वाले पुरुष प्रधानाचार्यों की सेवा समाप्ति कि खबरें,पोस्को और भी पता नहीं क्या क्या।फिर मुझे महसूस हुआ कि क्या इन सभी मामलों में पुरुष ही दोषी थे।क्या वो इतने वासना लोलूप थे कि बिना किसी वजह के किसी को भी तथाकथित अश्लील मैसेज भेज रहे थे,अथवा महिलाओं को सरेआम निमंत्रण दे रहे थे।क्या वो सब पागल अथवा मानसिक विकृति के शिकार हैं कि चौबीस घंटे सिर्फ वासना पूर्ति में लगे रहते हैं। या फिर कहानी का दूसरा पहलू कभी रिपोर्ट ही नहीं हुआ।अखबारों में , डिपार्टमेंटल इंक्वायरी में सिर्फ महिला अथवा छात्रा का ही पक्ष सुना गया।पुरुष का पक्ष हो भी तो वो बोले क्या?कुछ बोले तो परिवार का दोषी,पत्नी से बेवफ़ाई का दोषी और ना बोले तो कैरियर बरबाद,समाजिक प्रतिष्ठा समाप्त।वो अपनी स्थिति पर कुछ बोले भी तो क्या? कोई सुनेगा नहीं।सुनेगा भी तो अपराधी उसे ही माना जाएगा।छात्राओं के साथ किसी भी तरह की चैट के लिए सिर्फ शिक्षक उत्तरदाई।क्यूंकि बच्चे तो अबोध होते। 18 साल तक उनको सब माफ़।
दिल्ली के वीभत्स निर्भया कांड में जिस शख्स ने निर्भया को सबसे ज्यादा निर्दयता से घाव दिए थे, उसकी योनि में हाथ डाल ओवरी को खींच शरीर से बाहर निकाल सड़क पर फेंक दिया था वो 18 वर्ष से कम था।नतीजा तीन माह के लिए बाल सुधार गृह की सैर और फिर आजाद।स्कूल में रेड करते वक़्त कितने छात्रों और छात्राओं के फोन जब्त करते हम।लगभग हर फोन पोर्न से भरे हुए।क्या छात्र , क्या छात्राएं।परन्तु शिक्षक की मर्यादा में बंधे खामोशी से सब नजर अंदाज करते।इसलिए सिर्फ स्त्रीलिंग होने से हर कोई अबोध हो ये आवश्यक नहीं।
 मैं पहली बार इस मुद्दे पर संजीदा हुआ।रोज की अखबारों की कर्तनो पर हम हंसी मजाक कर के निकल लेते हैं।पुरुष शिक्षकों का मजाक बना निकल लेते हैं।दो तीन दिन बाद भूल जाते हैं क्यूंकि कोई नया किस्सा अखबारों में होता। मैं पहली बार किसी पुरुष जिसके साथ ऐसा हुआ था उसके दिमाग से गुजर रहा था था।उसके अपराध बोध,उसकी छटपटाहट ,उसकी अपने आप से घृणा,उसके डर के साथ आत्मसात हो रहाथा। मैंने आंखे खोली। अपने बेहद घनिष्ठ मित्र जो पेशे से वकील हैं से इस मुद्दे पर बात की।वकील महोदय ने दो ऑप्शन दिए। पहला की कुछ ले दे के इस मुद्दे को सेटल करो क्यूंकि एक बात तो सपष्ट थी कि ये सारा प्लॉट सिर्फ पैसे ऐंठने के लिए घडा गया था।महिला क्यूंकि इस तरह की लूट की अभ्यस्त है तो समझाने बुझाने की गुंजाइश है नहीं।कई बार साधारण दिखने वाली चीजें बड़े गिरोहों की शक्लों में होती जिनमें कुछ वकील,पुलिस के लोग,शरारती तत्व और अपराधिक किस्म के लोग शामिल हो सकते हैं। 
दूसरा लड़ने का।जो तुम्हारे साथ हुआ किसी और के साथ ना हो इसके लिए लडना पड़ेगा।सारे कॉल डीटेल्स कि कॉपी लो मोबाइल कंपनी से।सारे एस एम् एस रिकॉर्ड। वटसअप और मैसेंजर के चैट जो क्लाउड स्टोरेज पर स्टोर होते या फोन की मेमोरी में तब तक रहते जब तक डिलीट करने के बावजूद उस मेमोरी स्लॉट पर कोई नई फाइल राइट ना होने तक सेफ रहते।फिर कोर्ट में देखते।परंतु तब तक राजू को शर्मिंदगी सेहन करनी पड़ेगी। 
मैंने राजू को फोन मिलाया।राजू को हिम्मत दी।मैंने कहा, “ कोई बात नहीं।गलती हो गई ना अनजाने में ही सही,ट्रैप हो गए।कोई बात नहीं।जो होना था हो चुका।अब सबसे पहले अपनी बीवी को बताओ की हुआ क्या है।रही तुम्हारे सोशल स्टेट्स की बात तो तुम डॉक्टर राज कुमार हो।जो बनाया है उसके लिए 25 साल की अध्यापक की मेहनत है और छात्र जीवन की रात दिन की मेहनत।वो छोटे मोटे आरोपों से धूमिल नहीं होने वाली। हां विरोधियों को थोड़ी देर का सकून मिल सकता है।वो इंपोर्टेंट है भी नहीं। होने दो एफ आई आर।कल देखता हूं।और क्या कर सकते। कम से कम ऐसी महिलाओं को पैसा तो कतई नहीं देंगे।खून पसीने की कमाई है यार।शिक्षक की कमाई।ईमानदारी की कमाई।“ 
राजू को शायद इसी हिम्मत कि आवश्यकता थी।उसने वाकई भाभी जी को बात बताई। अपने माता पिता को भी।शायद अपने सभी रिश्तेदारों और करीबी मित्रों को भी।मैंने भी अपने विश्व विद्यालय ,कॉलेज और नवोदय विद्यालय के एलुमनी छात्रों से संपर्क साधा ।पता चला कि राजू के पुलिस क्षेत्र के डी एस पी राजू के विश्व विद्यालय के पुराने मित्र हैं।राजू ने उनसे बात की।फिर पता चला कि राजू के गृह जिला के एस पी भी उनके किसी करीबी मित्र के जीजा है।करीबी मित्र राजू को ले एस पी साहब से मिला।बात शायद डी आई जी लेवल तक पहुंची। क्यूंकि महिला कुख्यात थी इसलिए समस्त पुलिस तंत्र कम से कम आधिकारिक स्तर पर इस बात पर सहमत था की महिला पर घात लगाई जाए और उसको ब्लैक मेल करने और एकटोर्षण मनी लेने के अपराध पर गिरफ्तार किया जाए।राजू से लिखित शिकायत एस पी साहब ने ली ।
अब अगला प्लान बना।ये तय हुआ कि किसी ऐसे मित्र को जो महिला का जानकार हो से महिला से मोल भाव करने को कहा जाए।फिर महिला को पैसा लेने हेतु किसी चिन्हित स्थान पर बुलाया जाए और नगदी पैसे पर केमिकल लगा महिला को दिया जाए, और महिला को रंगे हाथ गिरफ्तार किया जाए।तब तक राजू सारे कॉल डिटेल,वीडियो चैट के स्क्रीनशॉट,सारी फेसबुक और वॉट्सएप चैट की हार्ड कॉपी हासिल कर चुका था।
 मेरी दिल्ली में दो हफ़्ते की प्लाज्मा फिजिक्स पर राष्ट्रीय वर्कशॉप थी।रवाना होने से पहले मैंने राजू को फोन किया।राजू काफी पॉजिटिव था।उसने मुझे शुक्रिया किया की तुमने हिम्मत ना बढ़ाई होती तो मैं इतना एफर्ट ना करता।मैंने भी शुभकामनाएं दी और दिल्ली निकल गया।
दो सप्ताह की वर्कशॉप में सिर झुकाने का वक्त प्लाज्मा फिजिक्स के वैज्ञानिकों ने नहीं दिया।ना ही मुझे कोई फोन कहीं से आया। 
16 दिन बाद वापिस पालमपुर आया।स्कूल ज्वाइन करा। 
छुट्टियों के बाद नई कक्षा ,नए बच्चे।
 शाम को ऐसे ही राजू को फोन करा जानने के लिए की क्या हुआ?
 राजू काफी प्रसन्न था ।बोला,” थैंक्स यार।सब ठीक हो गया।सेटल कर लिया सब कुछ।“ मैंने पूछा कि वो महिला जेल में है? राजू ने लंबी आह भरी ।बोला “ तेरे दिल्ली जाने के बाद घटना क्रम बड़ी तेजी से बदला।दो दिन बाद ही मुझे फिर पुलिस थाने बुला लिया गया। सारा प्लॉट बना हुआ था।बस महिलाको पैसे लेने किसी चिन्हित स्थान पर बुलाना था और धर दबोचना था।इसी बीच इस शिकायत के बारे में लोगों को पता चल गया,मेरे विरोधियों को भी।फिर खेल कुछ और ही शुरू हो गया।मेरे विरोधियों को ये मौका जबरदस्त जान पड़ा।उन्होंने महिलाको ज्यादा धन उगाहने ,और एफ आई आर रजिस्टर करवा मेरा नाम अखबार में छपवा मुझे बदनाम करने की घिनौनी साजिश रची।किसी स्थानीय नेता से पुलिस स्टेशन फोन भी करवाए और किसी महिला नेता ने महिला आयोग तक शिकायत ले जाने और शहर में जलूस निकालने तक की धमकी पुलिस को दी।मेरे करीबी राजनेतिक नेता को भी जब ये पता चला तो उन्होंने इसे सेटल करने की सलाह दी।लडना बुरी बात नहीं लेकिन जो कुछ तुम्हे ,तुम्हारे परिवार को और तुम्हारे मित्रों को झेलना पड़ेगा वो तुम्हारी कल्पना से परे है।सारी उम्र के लिए जो दाग तुम पर लगेगा वो धुलेगा नहीं।अखबारों में छा जाओगे। एक बेहद करीबी मित्र जो पेशे से हाई कोर्ट में वकील हैं ने भी सेटल करने की सलाह दी।कोर्ट में बहस जिस तरह से होती वो भी बताया। न्यायालय के महिलाओं के पक्ष होने कि बात भी समझाई।वकील साहब ने आई टी एक्ट भी समझाया और आई टी एक्ट कि धारा 16 भी समझाई।फेसबुक पर बिना महि ला की रजामंदी के बात करना भी गुनाह है ,तुमने तो एरोटिक चैट की है।“मोड़ेस्टी ऑफ वूमेन” के नाम पर तुम्हे जज अंदर भी ठोक सकता। अब सारी चीजें फिर से हाथ से निकलती हुई दिखीं।मैंने आंखे बन्द कर के अपनी बेटी की,बेटे की शक्ल देखी की जब ये सारा किस्सा अखबारों में आएगा वो अपने दोस्तों को क्या जवाब देंगे।किस से नजर मिला पाएंगे।मेरी बीवी ,मेरे बूढ़े मा बाप किसको क्या जवाब देंगे।मेरी एक बेवकूफी कि वजह से किसी को सिर उठा के देखने की हिम्मत नहीं होगी।ना मित्र बचेंगे ना रिश्तेदार।'
" मैंने तय किया कि इस मामले को सेटल किया जाए।मैंने अपने बेहद करीबी मित्र जो महिला का अच्छा परिचित है ,को सेटल करने का अनुरोध किया।मेरे मित्र ने चीजें सेटल कर दी।मुझे ना पुलिस स्टेशन जाना पड़ा ना कुछ और करना पड़ा।मेरे मित्र ने कैसे क्या किया अभी तक मुझे नहीं बताया है।सिर्फ ये बताया कि एक महीने बाद बताऊंगा की क्या क्या हुआ।तब तक तुम आराम करो और पचास हज़ार रुपए मेरे अकाउंट में ट्रांसफर कर दो। चल मरने दे।इमानदार शिक्षक का पैसा है।हजम भी होना चाहिए। पर चलो पिंड छूटा। थैंक्स यार ।तूने सपोर्ट नी किया होता तो शायद डिप्रेशन में या तो फैंट हो जाता या आत्म हत्या कर लेता। “ 
मैंने आगे बात नहीं की।फोन काट दिया।फोन बिस्तर पर रख आइने के सामने जा खड़ा हुआ।आंखे बन्द की।पूरे किस्से को ध्यान से देखा।राजू को जबरदस्त तरीके से हनी ट्रैप किया गया था।महिला काफी लंबे समय से राजू का पीछा कर रही थी।और जब राजू अपने परिवार से दूर था,अकेला था तो वो शिकार पे उत्तर आई और कर भी गई।मेरी आंखे तेजी से पलको में घूम रही थी। एक एक कर के किस्से मेरी आंखो के आगे प्रकाशित हो रहे थे।मेरे एक रसायन विज्ञान के प्रवक्ता मित्र को किसी ने इस लिए फसा दिया कि 15 साल पहले हुई पी टी ए की अपॉइंटमेंट के समय मित्र ने उस शख्स की सहायता नहीं की थी।प्रवक्ता के विरुद्ध किसी छात्रा से झूठी शिकायत करवाई गई।ये तो भला हुआ की पेरेंट्स,स्टाफ और अन्य छात्र प्रवक्ता मित्र की सपोर्ट में खड़े हो गए वरना मित्र पोस्को एक्ट के तहत अंदर होता।इसी तरह मेरे एक मित्र जो भौतिक विज्ञान के प्रवक्ता है को उन्हीं के स्टाफ के किसी सदस्य ने जलन वश किसी लड़की को बहला कर झूठी शिकायत करवा दी।मेरे बेहद करीबी मित्र जो प्रधानाचार्य है उनके ही स्कूल के डी पी ने गाड़ी में भांग छुपा कर फसाने की कोशिश करी।बाद में पता चला कि कुछ छात्राओं को भी डी पी साहब ने तैयार किया था कि वो प्रधानाचार्य पर योन शोषण का आरोप लगाएं। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस तक पर कीचड़ उछला। 
ऐसे हज़ारों किस्से मेरी आंखो के सामने से गुजर रहे थे।सब में पुरुष दोषी।अथवा पुरुष को दोषी करार देने कि पुरजोर कोशिश।इस खेल में पत्रकार,बुद्धिजीवी ,आम जन सब शामिल हो जाते।बिना किसी जांच के आरोपित पुरुष अपराधी।बाद में छूट भी जाए,बा इज्जत बरी हो जाए तो कोई अख़बार नहीं लिखेगा।परिवार और पुरुष किस किस को सफाई देगा।
मुझे लगा इन मुद्दों पर समाज ,बुद्धिजीवी और न्याय पालिका को नए सिरे से सोचने की आवश्यकता है।जरूरत से ज्यादा महिला पक्षीय होती न्याय व्यवस्था और उसकी आड में चल रहे ऐसे गोरख धंधों पर पूरी न्यायिक व्यवस्था में एक नई बहस शुरू होनी चाहिए। . 
मैं अभी भी आइने के सामने खड़ा था। सिर झुकाए। फिर मैंने आंखे खोली ।सिर झुका के अपनी ही छवि को भृकुटी ताने निहारा।फिर मेरे दोनों हाथ मेरी ही छवि की तरफ उठे और मुह से नफरत भरी ,गहरी उदासी पूर्ण आवाज निकली, ” …….पुरुष ….“
 सचिन ठाकुर, 
प्रवक्ता : भौतिक शास्त्र, 
राजकीय बाल विद्यालय धरमशाला की फेसबुक वॉल।

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