नमस्ते।
भारतीय संस्कृति की ये सम्मान और आदर की शारीरिक भंगिमा सर्वत्र अपना ली जाएगी।
दोनों हाथ जोड़, हलका सा सिर झुका और आंखें मूंद प्रणाम,सादर प्रणाम, प्रनिपात अथवा नमस्ते कहने की प्रथा कब शुरू हुई, इतिहास में दर्ज नहीं है।
फिर भी रिग वेद की सूक्तियां(रिक) जिसमें इन्द्र ,अग्नि, सूर्य,मित्र और वरुण की पूजा का उल्लेख है शारीरिक भंगिमा की तरफ कोई इशारा नहीं करती।
रिग वेद में ही " रुद्र" नाम के वैदिक भगवान का उल्लेख है जिसे वर्तमान में भगवान शिव के साथ जोड़ा जाता है।परंतु ये गलत है।
"रूद्र" भयंकर तबाही करने वाला कोई वैदिक भगवान है जिसका भगवान शिव के साथ कोई लेना देना ही नहीं है।लाल रंग के शरीर वाला ,भयंकर मौसम लेने वाला,आग बरसाने वाले इस वैदिक भगवान को शिव कब मान लिया गया इस बारे में स्कॉलर एक मत नहीं है।परंतु फिर भी रिग वेद में जब भी पांच वर्णित देवता " रुद्र" को शांत करने हेतु उनके समक्ष जाते हैं तो वो दोनों हाथ जोड़ प्रणाम करते हैं।
इसलिए चलिए मान लेते हैं कि प्रणाम करने की शारीरिक भंगिमा का भारतीय संस्कृति में कोई 6 हज़ार वर्ष पूर्व आरम्भ हुआ होगा।
"शेक हैंड" अर्थात हाथ मिलाना दुनिया में सर्वत्र सम्मान के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शारीरिक कलाप है।संक्रमण काल गुजर जाने के बाद जब विश्व नए विधान की तरफ देख रहा होगा तो शायद ही कोई शेक हैंड करे।
"शेक हैंड " की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है।
अर्चेओल्जी और पुरातत्व विभाग के के दस्तावेज बताते हैं कि हैंड शेक वास्तव में पुरानी ग्रीक सभ्यता में आरम्भ हुआ।
ये कोई सम्मान की भंगिमा नहीं है।ग्रीक सभ्यता में इसे " देक्षियसिस" कहा जाता है ।ये भंगिमा वास्तव में युद्ध में अपनाई जाती थी जिसका अर्थ होता था कि शत्रु के हाथ में कोई शस्त्र नहीं है। हारे हुए अथवा आत्मसमर्पण करने वाले शत्रु के साथ शेक हैंड करने का कारण सिर्फ ये जानना होता था कि शत्रु पूर्णतः शस्त्र हीन है।
तो युद्ध, घृणा और हिंसा में प्रयुक्त होने वाली ये शारीरिक मुद्रा सम्मान कि मुद्रा कैसे बनी इस पर शोध किया जा सकता है।
ग्रीक पुरातत्व की खोजों में कुछ राजाओं की बेवफ़ा पत्नियों द्वारा अपने पतियों की हत्या कि साजिशों के बेनकाब होने के बाद उनके हैंड शेक का भी उल्लेख है।
वर्तमान समय में हैंड शेक दुनिया में वायरल इंफेक्शन का दूसरा सबसे बड़ा कारण है।सार्स महामारी से ले करोना महामारी हैंड शेक हर जगह वायरस फैलाव का बड़ा कारक है।
उम्मीद है ,इस वक़्त से ले के तब तक ,जब तक,आप जिंदा हैं,तब तक आप सम्मान,प्रेम ,अपना पन दर्शाने हेतु केवल और केवल दोनों हाथ जोड़ कर प्रणाम ही करेंगे।
ये वैज्ञानिक है,कम से कम आप अपने हाथों से ना तो रोगाणु और विषाणु फैलाएंगे ना किसी और से ग्रहण करेंगे।
सचिन ठाकुर
प्रवक्ता भौतिक शास्त्र,
राजकीय बाल विद्यालय धरमशाला की फेसबुक वाल

Nice
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ReplyDeleteVery informative
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