Saturday, 8 May 2021

मास्क और 5 G :

 विज्ञान लेख 11:

मास्क और 5 G :
बचपन में हम सभी ने किसी ना किसी कक्षा में एक सुपरहिट निबन्ध पढ़ा अथवा लिखा जरूर है," विज्ञान अभिशाप अथवा वरदान "।
मजेदार बात ये है कि इस निबन्ध का आजतक कोई फलसफा निकल ही नहीं पाया।अपनी " विज्ञान लेख" की श्रृंखला के ग्यारहवें लेख में कोशिश करता हूं कि इस द्वंद का पटाक्षेप कर ही दूं।हालांकि आप बहस को लंबा खिंचने के लिए स्वतंत्र हैं।
तो वर्तमान में पूरी दुनिया कोविद महामारी से जूझ रही है।जब में ये लेख लिख रहा हूं उस समय लगभग 10 लाख लोग इस महामारी से मारे जा चुके हैं ।आंकड़ा दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है।
हालांकि मृत्यु का आंकड़ा खौफ पैदा करता है परन्तु आजू बाजू करोना संक्रमित लोगों को साधारण ज्वर या खांसी के लक्षणों के अलावा किसी अन्य तकलीफ में ना देख और बिना किसी इलाज के खुद ही ठीक होते देख हैरानी भी होती है और संशय भी होता है कि कोई अदृश्य ताकत नेपथ्य में बैठ इस बीमारी कि स्क्रिप्ट तो नहीं लिख रही है।
मुझे ओबामा का भाषण याद है जब अमेरिकी राष्ट्रीय टेलीविजन पर उन्होंने एच वन एन वन वायरस से 20 लाख लोगों की मृत्यु होने का दावा किया था और सभी अमेरिका वासियों को इसका टीका लेने को कहा था।अमेरिका के लोगों ने टीका लेने को मना कर दिया और मजेदार बात ये कि 20 लाख तो दूर बीस हज़ार लोग भी इस वायरस के संक्रमण से नहीं मरे।फार्मा कम्पनियों को अरबों रुपए का मुनाफा कमाने का मौका हाथ से फिसल गया।
अब करोना संक्रमण के समय भी वैक्सीन युद्ध छिड़ चुका है।कुदरती रूप से स्वस्थ होते लोगों को देख एक नया प्रचार जन मानस के दिमाग पर छोड़ा जा रहा है कि संक्रमण की पहली वेव से बच भी गए तो दूसरी वेव में नहीं बच पाओगे इसलिए वैक्सीन लेना अति आवश्यक है।
अब देखिए,प्रचार एक तरफा हैं।
मास्क को कितना प्रचारित किया गया।
निसंदेह आपका मास्क पहन कर भीड़ भाड़ वाले इलाके में जाना आवश्यक है।परंतु आपको ये कोई नहीं बताता कि घर पर,अपनी गाड़ी में,अपने ऑफिस में जहां आप अकेले हो वहां मास्क हरगिज मत लगाइए अन्यथा ये मास्क आपको करोना से भी कहीं ज्यादा बीमार कर देगा।
समझिए,आपका मास्क आपको कम मात्रा में ऑक्सीजन उपलब्ध करवाता है।आपके द्वारा सांस में बाहर निकाली गई कार्बन डाइऑक्साइड गैस आपके मास्क से टकराकर फिर वापिस आपकी सांस से होती हुई आपके फेफड़ों में पहुंच रही है।इसके साथ आप का मास्क जिन तंतुओं से निर्मित हुआ है उसके माइक्रो पार्टिकल भी सांस के साथ आपके फेफड़ों तक पहुंच रहे हैं।उदाहरण तः हलकी मात्रा में उपयोग हुए पलास्टिक के माइक्रो प्लास्टिक कण आपके फेफड़ों में जा रहे जो अनेकों प्रकार के कैंसर आपके शरीर में पैदा करते हैं।ऑक्सीजन की अप्रचुर मात्रा आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को वैसे ही कम कर रही है।
डर ,अवसाद,क्षीण होती आपकी आर्थिक स्थिति,नौकरी जाने का खौफ,सामाजिक अस्त व्यस्तता वैसे ही आपको दिमागी तौर पर कमजोर बना रही जो आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता पर भी निश्चित तौर पर असर डालेगी।
अब ऐसी स्थिति में करोना कि दूसरी वेव निसंदेह काफी घातक होगी।
दूसरी विकराल समस्या जो इसी समय उपलब्ध है वो है मोबाइल टकनोलजी में पांचवीं पीढ़ी( 5 जी) की।ये तकनॉलाजी 30 गीगा हरट्स से के कर 300 गीगा हर्ट्स की फ्रीक्वेंसी की रेडिएशन का इस्तेमाल करेंगी।लंबे समय के शोध हमे बताते हैं कि मात्र 1.8 गीगा हर्ट्स की रेडिएशन ही दिल का कैंसर,दिमाग का कैंसर जैसे खौफनाक रोगों को जन्म देती है जिसे अब तक मेडिकल साइंस में गिना ही नहीं जाता। 5 जी का रेडिएशन स्पेक्ट्रम आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को और भी नुकसान पहुंचाएगा।हमारे वर्तमान में इस्तेमाल किए जाने वाले फोन बमुश्किल 500 से 1500 मेगा हर्ट्स की फ्रीक्वेंसी की रेडिएशन इस्तेमाल करते हैं ।
अब जब भारी संख्या में लोग मृत्यु को प्राप्त होंगे तो वेक्सिन लेना आवश्यक हो ही जायेगा और फार्मा कम्पनियां खरबों डॉलर कमाएंगी।
अब ध्यान से सोचिए।
विज्ञान ने मोबाइल का आविष्कार लंबी दूरी तक वार्तालाप करने के लिए बिना तारों का प्रयोग करने को किया था।इंटरनेट पर एडवरटाइजमेंट करने, आभासी दुनिया की आदत लगा,डाटा को द्रुत गामी रफ्तार से पहुंचाने और उससे पैसा कमाने कि मंशा तो विज्ञान कि कतई नहीं थी।ठीक इसी तरह विज्ञान ने भयंकर वायरस से लडने के कई उपाय मानव जाति को सुलभ करवाए है,उसकी आड़ में अरबों खरबों का व्यपार विज्ञान ने बिल्कुल नहीं सिखाया।
ये कुछ बड़े पूंजीपतियों की बेपनाह दौलत समेटने की हवस है जिसने विज्ञान को थोड़ी ही देर के लिए ही सही,परंतु जीवन का ही विरोधी बना दिया है।बन्दर के हाथ में उस्तरा पकड़ा दिया है।
तो फिर बताइए ," विज्ञान वरदान या अभिशाप "?
सचिन ठाकुर,
प्रवक्ता भौतिक शास्त्र,
राजकीय बाल विद्यालय धरमशाला की फेसबुक वाल

No comments:

Post a Comment