सामाजिक दूरी ,कब तक :
अब तो अरबों दिमागों में ये सवाल प्रति तीस सेकंड की दर से कोंध रहा होगा।आखिर ये समाजिक दूरी कितने समय और चलेगी।।क्या लॉक डॉउन शिघ्र ख़तम हो जाएगा।हमें कब तक घरो में रहने के लिए कहा जाएगा।
जवाब है।
अभी बहुत लंबी चलेगी ये सामाजिक दूरी।शोध लगातार जारी है।खूब सारे शोध और उनके परिणामों के आधार पर मैं कह सकता हूं कि ये क्रम बहुत लंबा चलने वाला है।
सामाजिक दूरी बनाए रखने के लिए बहुत सारे बिंदु ध्यान में रखने पड़ेंगे।
इन बिंदुओं में सर्वाधिक महत्वपूर्ण है झुंड प्रतिरक्षा(herd immunity) ।झुंड प्रतिरक्षा आम जन का प्रतिशत है कि पूरी जनसंख्या का कितना हिस्सा वायरस के लिए अपने शरीर में प्रतिरक्षा उत्पन्न के चुका है।अगर जनसंख्या का एक बहुत बड़ा हिस्सा वायरस से प्रतिरक्षा उत्पन्न कर चुका है तो फिर बीमार लोगों द्वारा स्वस्थ लोगों को इनफैक्ट करने का बहुत कम मौका है।वायरस के पास ट्रांसमिट होने का कोई मौका नहीं होगा।इससे महामारी रुक जाएगी और मृत्यु दर पर काबू पाया जा सकेगा।
झुंड प्रतिरक्षा हासिल करने के दो तरीके हैं।पहला की कम से कम तीन चौथाई जनसंख्या को वायरस से संक्रमित किया जाए।सामाजिक दूरी निसंदेह इंफेक्शन कम करने और मृत्यु दर पर काबू पाने का सबसे सरल तरीका है।परंतु सामाजिक दूरी झुंड प्रतिरक्षा उत्पन्न करने में सबसे बड़ी बाधा भी है।
दूसरा तरीका सार्स कोव-2 के लिए वैक्सीन त्यार करने और उसे लगने का है।परंतु सच्चाई ये है कि इस वायरस का टीका त्यार करने में हमें अभी कम से कम 18 महीने लगेंगे।
तीसरा तरीका जिससे समाजिक दूरी को शीघ्र समाप्त किया जा सकता है वो है कम्युनिटी टेस्टिंग।हमें बड़े स्तर पर वायरस टेस्ट करने होंगे।ये टेस्ट नए मरीजों कि जल्द पहचान करेंगे और स्वस्थ्य सेवाओं में लगे पेशेवरों को उनको आइसोलेट करने में देरी नहीं लगेगी।अधिकांश लोग जो वायरस लिए घूम रहे हैं उनमें इंफेक्शन के कोई लक्षण नहीं दिखते।70% लोग जो इंफेक्शन ग्रस्त होते हैं वो बिल्कुल भी बीमार नहीं पड़ते परंतु वायरस लगातार ट्रांसमिट करते रहते हैं।इसलिए टेस्ट की संख्या को बढ़ाना बेहद आवश्यक है।ताकि हर वायरस कैरियर को आइसोलेट किया जा सके और सोशल डिस्टैंस को घटाया जा सके,लॉक डॉउन को समाप्त किया का सके।
विज्ञानिको के पास ऐसे कोई सबूत नहीं है कि तापमान में वृध्दि के साथ वायरस के फैलाव में कमी आएगी।हालांकि अगर ऐसा हुआ तो लॉक डॉउन में आंशिक कमी की जाए।
कोई नहीं जानता के ये महामारी एक साल लेगी या इस से अधिक समय।इसलिए सरकारों को सामाजिक दूरी और सीमित लॉक डॉउन की नीतियां बनानी पड़ेंगी।इंफेक्शन का स्तर तय करेगा कि कितने वर्षों तक सामाजिक दूरी और घूमने पर पाबन्दी रहेगी।सामाजिक दूरी महामारी से युद्ध में मददगार है परन्तु शोधकर्ताओं को डर है कि लॉक डॉउन और सामाजिक दूरी कि शर्ते हटाने के बाद महामारी के और भी घातक स्वरूप में फैलने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी।
सामाजिक दूरी का सरल सा अर्थ है कि अपने आप को दूसरे मनुष्य से कम से कम सात फीट की दूरी पर रखिए।महीनों तक घर से काम कीजिए और स्कूल ,कॉलेज को कई महीनों तक भूल जाइए।परिवार या मित्रों के साथ किसी के घर अथवा किसी अन्य जगह कतई मत जाइए।दुकान, मॉल या सब्जी लेते समय भी दूसरे व्यक्ति से कम से कम सात फुट की दूरी रखिए।चूंकि वायरस के फैलने का मुख्य कारण हवा में उपलब्ध वायरस युक्त तरल बूंदे हैं जो संक्रमित व्यक्ति के छींकने और खांसने से निकलती हैं।सात फुट की दूरी इस बात को सुनिश्चित करेगी कि ये बूंदे आपके नाक ,मुंह और आंखो से आपके शरीर में नहीं घुसी।
ताजा शोधों से ये भी पूर्णतः साबित हो गया है कि ये वायरस लेबोरेटरी में नहीं बना है बल्कि प्रकृति जनित है।विश्व भर के शोधों से एक ही परिणाम सामने आया है कि चीन के बूहान की गैर कानूनी मांस बाजार में ये वायरस मनुष्यों के शरीर पर आक्रमण कर गया।चूंकि वुहान और इटली का जबरदस्त व्यपारिक जुड़ाव है,लगभग एक लाख लोग प्रति सप्ताह वुहान और इटली के बीच सफर करते हैं ,इस कारण ये इटली में बुरी तरह फैला।फिर संक्रमण वैश्विक होता गया।
इटली की समस्या उसकी 30% जनसंख्या है जिसकी उम्र 60 साल से ऊपर है और वो दुनिया कि दूसरी सबसे बुढ़ी जनसंख्या का घर है।शायद इसीलिए वहां मृत्यु दर अधिक है।हालांकि इस शोध को जापान पर लागू नहीं किया ज सकता जहां की 35% जनसंख्या 60 के पार है परंतु अभी तक वायरस इंफेक्शन से एक भी मृत्यु नहीं है।
तो कुल मिला कर अभी सामाजिक दूरी और लॉक डॉउन का सिलसिला बहुत लंबा चलने वाला है।सरकारें बहुत प्रयत्न कर रही हैं। सारा प्रशासनिक ,पुलिस और स्वास्थ्य अमला अपने आपको झोंका हुआ है सिर्फ आपकी जान को बचाने के लिए।
एक आप हो की कभी तबलीगी जमात के वाहियात , अविज्ञानीक और गैर जिम्मेदाराना भाषणों को सुन ने मुंह उठा के चल देते।कभी अयोध्या चल देते,गीता पाठ सुनने चल पड़ते तो कभी गुरद्वारों में इकठ्ठे हो जाते।
अब तो सुना आपने अपनी जान जोखिम में डाल कर आपको बचाने निकले डॉक्टर्स को पत्थर मारना शुरू कर दिया,उनके मुंह पर थूकने शुरू कर दिया।
आइने के सामने खड़े हो के अपने आप को देखिएगा।आइने में आपको एक बेहद घटिया,धर्मांध,गैर जिम्मेदार,नीच नजर आएगा।
सचिन ठाकुर,
प्रवक्ता: भौतिक विज्ञान,
राजकीय बाल विद्यालय धरमशाला की फेसबुक वाल से

No comments:
Post a Comment