गाड़ी का फंडा।
दिलचस्प है।।ध्यान से पढ़िएगा।
आपने गाड़ी ली।।कीमत 15 लाख रुपए।
सरकार की नई स्क्रैप पॉलिसी में आप इस गाड़ी को सिर्फ 15 साल चला पाएंगे। फिर उसे कबाड़ समझा जायेगा और निर्माता कम्पनी को वापिस कर दिया जायेगा।मतलब आपने गाड़ी किराए पर ली है 15 साल के लिए, वार्षिक किराया 1 लाख रुपया।
अब गाड़ी पर 6 % की दर से आपने पंजीकरण फीस दी और इंश्योरेंस लिया कुल 1.50 लाख रुपया।अगले 15 वर्षों तक आप कुल 3.50 लाख रुपया इंश्योरेंस का देंगे ।दोनो मिला के 5 लाख रुपया।यानी 34 हजार रुपया प्रतिवर्ष ।
तो अभी आपने गाड़ी चलाई ही नहीं और उसका एक साल का औसतन खर्चा हो गया एक लाख 33 हजार रुपए।
चलो अब चलाना शुरू करते हैं।औसतन आपकी गाड़ी एक साल में 30 हजार किलोमीटर चलती है।तो सिर्फ पेट्रोल और डीजल का खर्चा हुआ 1.80 लाख रुपए।गाड़ी की सर्विस, टोल टैक्स,कंपोनेंट रिप्लेसमेंट, टायर बदलवाने और धुलवाने का औसतन खर्चा 70 हजार सालाना के आस पास बैठता है।
मतलब गाड़ी चलाने का कुल खर्चा कोई 3 लाख रुपए सालाना के आस पास ।
मैं ये मानकर चल रहा हूं की आप बैंक से लोन नहीं ले रहे।अगर ले रहे हैं तो उसका ब्याज भी जोड़ लीजिए।15 लाख लोन अगर आप पांच साल के लिए लेते हो तो उसका ब्याज 3 लाख 90 हजार रुपए बनता है।
तो कुल मिला के 15 लाख रुपए की गाड़ी,15 साल के लिए हर साल आपका 4.5 लाख रुपए डकार जाती है।
आपको जानकर हैरानी होगी परंतु इस 4.5 लाख रुपए में से पेट्रोल पर 60₹ प्रति लीटर टैक्स और गाड़ी की कीमत , इंश्योरेंस ,सर्विसिंग पर 18% जी एस टी, टोल टैक्स,रजिस्ट्रेशन फीस सीधा सरकार को जाता है।मतलब 4.5 लाख रुपए में से लगभग 3 लाख रुपए सीधा सरकार की तिजोरी में।
और आप हैं की 240 रुपए के कोविड वैक्सीन को भी फ्री मानकर खुश हो जाते हैं।
सचिन ठाकुर,
प्रवक्ता भौतिक शास्त्र
राजकीय बाल विद्यालय धर्मशाला की फेसबुक वाल

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