क्या हुतियापा चल रहा।
बच्चे की ऑनलाइन डांस क्लास।। बच्चा कमरा बन्द कर के डांस कर रहा।वहां मैडम जी अकेले म्यूजिक लगा के , कमरे में ठुमके लाइव कर के क्लास लगा रही।
मम्मा का मोबाइल तो आजकल बच्चे का मोबाइल बना हुए।स्कूल से ज्ञान लाइव हो रहा।लाइव ज्ञान में मम्मा बच्चे के साथ बैठी हुई।पानी,खाना,बिस्किट,मैगी,अं गूर हर पांच मिनट में बच्चे के मुंह में ठूंस रही।अब मोबाइल बच्चे के पास है तो वॉट्सएप और फेसबुक तो सौतेलेपन से रो रहे।
बाप बेचारा टी वी लगाए तो बच्चा चीख पड़ता ," पापा साउंड म्यूट करो,क्लास चल री,,,समझ नी आता आपको।"
बाप बेचारा करे तो क्या करे,मोदी जी भी मन की बात लिख कर नहीं करते की पढ़ ही लेते।
अध्यापक परेशान।हर तरफ से।कुछ इसलिए की ऑनलाइन मटेरियल बनाएं क्या तो कुछ इसलिए की जो बनाया उसे पहुंचाएं कैसे।।इतना डाटा तो है ही नहीं अपलोड करने को।कुछ ज़ूम और गूगल की सहायता से वर्चुअल क्लास रूम की कोशिश में थे पर घर पर किसके पास बोर्ड और हाईलाइटर।कुछ वीडियो बना के यू ट्यूब पर अपलोड कर रहे और परेशान हो रहे की उनके व्यू की संख्या 100 से ऊपर नहीं जा रही।विभाग ने विडियोज तैयार करवाए वो इतने बोरिंग की दो मिनट में उबासी ,पांच मिनट में आंख बन्द और दस मिनट में खर्राटे।
आई डी धीमान जी शिक्षा मंत्री थे।मेरे पिछले एक स्कूल में एनुअल डे पर मुख्य अतिथि थे।अपने शिक्षण के दिनों में इसी स्कूल में उन्होंने कोई दस साल सेवाएं दी थी।अपने अभिभाषण में बच्चों के मोबाइल इस्तेमाल पर बेहद सख्त दिखे।मैंने पूछ लिया,इतनी सखती काहे को, लाने दो बच्चों को मोबाइल स्कूल ।बोले तुमको नहीं पता ,ये स्कूल मोबाइल ला के पूरा दिन उस पर गाने सुनते रहते।मैंने भी चुटकी ली ,"तो साहब गाने गाए ही सुनने के लिए जाते।" वो मुस्कुरा के टाल गए पर अगले दिन बड़े कठोर आदेश मोबाइल के इस्तेमाल पर शिक्षा विभाग ने निकाले।अब वो ही मोबाइल सुभा से शाम बच्चों के गले की घंटी बने हुए हैं।
आंखे फुट जाएंगी।ब्लू लाइट आंखो के विट्रियस ह्यूमर को ना ठीक होने वाली हानि पहुंचा रही। सूजी,लाल और खारीश करती आंखो को बोरिक एसिड से धुलवाना मम्मा के काम में एक नया जुड़ाव है।
मम्मियां दुखी।सुभा ऑनलाइन क्लास ,शाम को ऑनलाइन टेस्ट।ना जिम,ना वॉक।दो महीने में ही शरीर सुराही हो लिया।बीच के टायर नए इंसानी शरीर का प्रारूप बता रहे। दरजी परेशान ऐसा लिबास कैसे बनाएं जो ऊपर नीचे से टाईट और बीच से झोला हो।
बाप थक गया सब्जियां ढो ढों के।शाम को ऑफिस में शहनाइयां बजा के ,सब्जी,चावल , आटा दाल का बोरा घसीट के घर पहुंचे तो बच्चे की ऑनलाइन क्लास के चक्कर में मम्मा बीजी हैं।कोई पानी का गिलास पूछ के राजी नहीं। चूसे हुए आम की तरह का थोब् डा उठा खुद ही फ्रिज से पानी पीता तब कहीं खरबूज में थोड़ा बहुत पानी पड़ता।
क्या है यार।क्या हुटियापा है।
फीस के चक्कर में बेचारी बसंती अकेले कमरे में नाच कर बच्चों को ऑनलाइन नचवा रही।वीरू की बाहें बंधी हुई जंजीरों के साथ।
गब्बर एयर कंडीशन कमरे में बैठ सांबा और कालिया से फीडबैक ले रहा और डायलॉग झाड़ रहा," कितने आदमी थे....ऑनलाइन"
सचिन ठाकुर,
प्रवक्ता भौतिक शास्त्र,
राजकीय बाल विद्यालय धरमशाला की फेसबुक वॉल




