Sunday, 15 December 2024

 विज्ञान लेख 27:

50 पर:

आहा ,तो आप 50 के हो गए।

कोई न।

मेरी घनिष्ठ मित्र सविता आठ दस साल के लिए एक ही उम्र पर रहती है।35 से 45 के होने के बाजूद अपनी उम्र 35 ही बताती रही।अब 50 की होने को है पर पिछले पांच सालों से उम्र 44 ही बता रही🤪🤪।अच्छा है।मुझे उसकी यही जीवटता पसंद है।

तो चलिए आज बात करते हैं उन नए शोधों की, जो 50 साल के होने पर आपकी बेहतरीन सेहत के प्लान पर असर डाल सकते हैं।

1. मैग्नीशियम : मैग्नीशियम आपके शरीर की 300 से अधिक बायोकेमिकल रिएक्शन को प्रभावित करता है।रक्त चाप,ग्लूकोज रेगुलेशन और प्रोटीन सिंथेसिस के लिए मैग्नीशियम का महत्वपूर्ण योगदान होता है।50 के बाद आपके शरीर की मैग्नीशियम को ग्रहण करने की क्षमता घट जाती है। क्रैंप्स,थकावट,भूलने की बीमारी ,अनिद्रा और इंग्जेटी जैसे लक्षण मैग्नीशियम की कमी का सीधा इशारा है।मैग्नीशियम थ्रियोनेट दिमाग के लिए ,मैग्नीशियम सिट्रेट इंटेस्टाइन के लिए ,मैग्नीशियम मलेट ऊर्जा के लिए बेहतरीन सप्लीमेंट हो सकते है। स्पींच ,एवोकाडो आलमंड और डार्क चोकोलेट बेहतरीन भोजन हो सकते हैं।मैग्नीशियम स्ट्रोक के खतरे को भी कम करता है।हालांकि अगर आप किडनी की किसी व्याधि से ग्रसित हैं तो बिना डॉक्टर की सलाह के सप्लीमेंट लेने से परहेज रखिए।

2.विटामिन डी: विटामिन डी हड्डियों के लिए ही नहीं रोग प्रतिरोधक क्षमता,मानसिक स्वास्थ्य और स्वस्थ दिल के लिए भी आवश्यक है।अब इसे प्रकृति ने आपको मुफ्त का दिया है।सूर्य की रोशनी से ही काम चल जाएगा।परंतु आपने जो घर बनाया है ना ,कॉलोनी बनाने के चक्कर में झोंपड़पटी बना डाली,घरों से सटे घर बना डाले इसी चक्कर में शोध के अनुसार हर तीसरा शहरी भारतीय विटामिन डी की कमी से जूझ रहा है।

घर खुली जगह बनाना था,आजू बाजू के मकान में इतनी दूरी जरूर रहनी चाहिए की हवा और धूप बाधित न हो।परंतु दुखद ,भू माफिया के बढ़ते लालच और आपकी बेबसी ने ऐसा होने न दिया।

अब हर तीसरा भारतीय जोड़ों का दर्द ,मेमोरी लॉस से परेशान है।तो फिर कोशिश करिए की कम से कम एक घंटा धूप में गुजरे ।फिश और अंडे भी सहायता कर सकते हैं।

3. विटामिन बी 12 : सुभा उठने का दिल नहीं कर रहा,याद रखने में परेशानी हो रही,थकावट है , किसी काम में दिल नहीं लग रहा और टांगे भारी लग रही तो समझ जाओ की शरीर विटामिन बी 12 की कमी से जूझ रहा।50 बाद पेट की अम्ल पैदा करने की क्षमता जो विटामिन बी 12 को ग्रहण करने के लिए आवश्यक है, घट जाती है।अगर आप मधुमेह के लिए दवा ले रहे या रिफ्लक्स मेडिकेशन ले रहे तो हालात और भी बुरे हो सकते हैं।तो फिर अपने खाने में बदलाव लाना ही साधारण उपाय है।लाल मांस,फिश, अंडे और दूध आपकी सहायता कर सकते है।हालांकि जिनका पाचन तंत्र सही काम नहीं कर रहा उनको इस विटामिन के इंजेक्शन लेना ही सही उपाय होगा।

हालांकि ये लेख विभिन्न विज्ञान पत्रिकाओं में छपे शोधों पर आधारित है फिर भी डॉक्टर की सलाह और सहायता आवश्यक है।

शोध बता रहे हैं की 50 पार होने पर जिम जाना जोखिम पैदा कर सकता है,खास कर यदि आप हार्ड एक्सरसाइज कर रहे हैं तो।सबसे बेहतर है की आप 30 मिनट की धीमी और लगातार दौड़ पर शिफ्ट हो जाएं।अगर ये भी नहीं तो सुभा सुभा एक घंटे की वॉक उसके बाद योग या हल्का व्यायाम सबसे बेहतरीन एक्सरसाइज है।

चीनी को तुरंत बंद करें।नमक भी धीमा।देसी घी से परहेज करिए और खाना ऑलिव ऑयल या खुद के सरसों के तेल में बनाइए।

खाना खाइए,प्रोडक्ट कतई नहीं।मतलब आलू खाइए,आलू के चिप्स नहीं।

दिमागी तौर पर मैच्योर होना बेहद आवश्यक है।अब आपको अपनी फालतू की इगो को बिलकुल किनारे करना होगा।ऐसे लोग,ऐसी जगहें ,ऐसी चर्चाएं और अपनी ऐसी करनीयों से तुरंत अपने आपको मुक्त करना होगा जो आपकी मानसिक शांति में खलल डालते हैं।

अगर आप किसी उच्च पद पर आसीन हैं तो फिर अपने कनिष्ठ लोगों को आदर की दृष्टि से देखना शुरू कर दीजिए ,उन्हें सही दिशा में प्रोत्साहित करना,उनकी सहायता करना सीख जाइए।अन्यथा आपकी रिटायरमेंट के बाद आपको सम्मान देना तो दूर ,वो आप से बदसुलूकी तक कर सकते हैं।मैने अपने ही एक साथी शिक्षक को शिक्षा विभाग के निर्देशक स्तर के अधिकारी के मुंह पर उनकी रिटायरमेंट के बाद थूकने का दृश्य देखा है।सोचिए वो अध्यापक किस कदर अधिकारी से नफरत लिए होगा।

अब इस उम्र में आपकी सामाजिक प्रतिष्ठा का नाश हो ये न तो आपके लिए अच्छा है ,ना आपके परिवार के लिए।

कुछ बेहतरीन मित्र ,जो अब तक आपका परिवार बन चुके होंगे उनके साथ अपने रिश्ते और भी प्रगाढ़ कीजिए।मित्र परिवारों के साथ कुछ महीनों के अंतराल पर दूर भ्रमण करने की आदत डालिए और महीने में कम से कम एक बार चाय पर या डिनर पर जरूर मिलिए।

घर पर हो चाहे बाहर बेहतरीन कपड़े पहनिए।राउंड नेक टी शर्ट और जींस को त्यागने का यही सही वक्त है।

मिडिल एज क्राइसेस,माइल्ड डिप्रेशन से आप इसी उम्र में दो चार होते हैं,जिसका आपको पता भी नहीं चलता।इसलिए कोई न कोई ऐसा शख्स जरूर ढूंढिए जिसके साथ आप कुछ भी शेयर कर सकें,कुछ भी सलाह ले सकें। उसका कंधा हो आपके पास सिर रख के रोने को और उसका वजूद आपके हाथ थामे रखने के काबिल हो बाकी बची उम्र के लिए। भले ही वो परिवार का हो या परिवार से बाहर का।

अब समझ जाइए की शारीरिक तौर पर आप जी नहीं रहे बल्कि रोज सरवाइव कर रहे हो।इसलिए खुल के जीना शुरू करिए।अपने पैसे को अपने ऊपर खर्च करना सीखिए, खूब सारी यात्राए कीजिए ,मरने से पहले देख लीजिए जितनी दुनिया देख सकते हो।

आडंबरों,पूर्वाग्रहों ,मान्यताओं,सामाजिक कुरुतियों से अपने आपको बाहर निकालिए,समझ जाइए के आपके पास यही जीवन है जिसका बड़ा हिस्सा आप जी चुके।ये भी समझ जाइए के ना ही तो कोई आत्मा है ना ही कोई परमात्मा की आप फिर से दुनिया में आओगे और अदानी अंबानी के घर पैदा होयोगे।जो है ,बस अब यही है।

और सुभा जब उठो ना, तो बड़ी अंगड़ाई लेना ,पूरे शरीर को खोलने वाली अंगड़ाई।फिर शीशे के सामने जा कर अपने आप को निहार के कहना," आह, मैं तो अभी जिंदा हूं....और रापचिक हूं.."

सचिन ठाकुर,

प्रवक्ता: भौतिक शास्त्र

राजकीय उच्च शिक्षा विभाग,

हिमचल सरकार


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