ओल्ड पेंशन स्कीम :
मुझे नहीं पता कि आपको पता है या नहीं परन्तु ये विचित्र सत्य है कि कोई अगर विधानसभा,लोकसभा या राज्यसभा का चुनाव जीत जाए और केवल शपथ ग्रहण कर ले तो वो आजीवन 70,000₹ पेंशन का हकदार हो जाता है ।यहां तक की यदि शपथ के फौरन बाद उसकी मृत्यु हो जाए तो ये पेंशन उसके आश्रित परिवार पर तुरन्त प्रभाव से लागू हो जाएगी।
इससे भी हैरानी जनक तथ्य ये है कि आप जितनी बार चुने गए आपको उतनी ही पेंशन लगेगी। मान लीजिए कि आप पांच बार विधान सभा के लिए चुने गए तो आपको चार पेंशन और एक तनख्वाह मिलेगी।मतलब आपकी महीने की औसत कमाई 4,3०,00० ₹ है।
पंजाब में ली गई एक आर टी आई में ये खुलासा हुआ कि 129 ऐसे वर्तमान या पूर्व विधायक हैं जो सात - सात पेंशन लेे रहे मतलब औसतन कोई पांच लाख रुपया महीना।।
भई वाह।इसमें कोई बुराई नहीं।
परंतु कैमरे का फोकस दूसरी ओर करिए।एक सरकारी कर्मचारी पर।30-35 साल लगातार काम करने के बाद कोई पेंशन नहीं।न्यू पेंशन स्कीम का झुनझुना जो किसी निजी कम्पनी के रेहमोकरम पर है और शेयर मार्केट के रुख पर भी।निजी कम्पनी कब भाग जाए इसकी कोई गारंटी नहीं।बैंक दिवालिया घोषित हो जाए तो आपको आपकी जमा पूंजी का कुल 10% ही आपको बैंक वापिस करने को बाध्य है,ऐसा आपके बैंक खाता खोलते समय शर्तों के कॉन्ट्रैक्ट पर लिखा है जो आपने कभी पढ़ा ही नहीं।
तो सवाल ये है कि पेंशन आखिर देता कौन है?क्या सरकार? क्या वो इस लायक है?क्या वो पैसा छापती है और फिर आपको उसको खर्च करने को देती है ?या फिर सरकार चला रहे कुछ चुने हुए नुमाइंदे अपनी जेब से पेंशन दे रहे?
नहीं।
आप अर्थ शास्त्र के बनावटी सिद्धांतो ,खास कर पूंजीवादी अर्थ शास्त्र के खोखले सिद्धांतो के मक्कड़ जाल में मत उलझिए।
सीधी सी बात ये है कि किसी भी देश की कुल आय उसके मानव संसाधन द्वारा किए गए पुरुषार्थ पर निर्भर करती है।ये वास्तव में आपका ही पुरुषार्थ है जो देश की संपूर्ण आय का निर्माण करता है।आपके द्वारा सम्पूर्ण समाज हित में किए गए उद्यम का हिस्सा है जो टैक्स अथवा अन्य मदों से सरकार तक पहुंचता है।
तो फिर जब आप पुरुषार्थ करने योग्य नहीं रहेंगे,आपकी धमनियों में रक्त प्रवाह शिथिल हो जाएगा तो आपको वही समाज भूखे मरने ,लाचारी से किसी दूसरे का मुंह ताकने,बीमारी में मंहगे हस्पताल के बाहर ठंड से मरने को छोड़ देगा।
जिस पुरुषार्थ के बल आप खुद्दारी से अब तक जीते आए उसके शिथिल होते ही आपको निरीह सब्जी समझ छोड़ दिया जाएगा।
कदापि नहीं।
खुद संपूर्ण समाज को ही इस बेइज्जती,जलालत,घोर अन्याय के खिलाफ उठ खड़े होना होगा।
इसलिए ताकि आप ,हम और हम से हर कोई अपनी जिंदगी को शान से समाप्त कर सके ।जलालत की मौत किसी को भी नसीब ना हो।
पेंशन बुनियादी अधिकार बने।कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन स्कीम हर हाल में पुनः लागू हो।
सचिन ठाकुर,
प्रवक्ता: भौतिक शास्त्र
राजकीय बाल विद्यालय धरमशाला की फेसबुक वाल

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