Saturday, 6 July 2024

वैदिक मैथमेटिक्स


 वैदिक मैथमेटिक्स:

आजकल न मुझे वैदिक मैथमेटिक्स समझने का दौरा पड़ा हुआ है...मानसून की छुट्टियां है ना।कुछ तो नया करना चाहिए अध्यापक को।

पहला कंक्लूजन जो मैं अब तक निकाल पाया वो ये है की "वैदिक मैथमेटिक्स " का वेदों से कोई लेना देना नहीं है।

दूसरा, बिना आधुनिक गणित की मूलभूत जानकारी ,गणित के फंडामेंटल समझे बगैर "वैदिक मैथमेटिक्स" पर हाथ मत आजमाइए वर्ना गणित समझ में ही नहीं आएगा , वेद तो छोड़ ही दीजिए।

"वैदिक मैथमेटिक्स" नाम से 1965 में एक किताब छपी थी जिसे "पूरी के शंकराचार्य कृष्य स्वामी" ने लिखा था ।हालंकि इस पुस्तक को उनकी मृत्यु के बाद उनके शिष्यों ने छापा था।ये दावा की इस पुस्तक की उत्पत्ति " अथर्व वेद" के एक परिशिष्ट से  हुई पूर्णता भ्रामक है।अथर्व वेद छान मारा, ऐसा कोई परिशिष्ट है ही नहीं।किसी को मिले तो मुझे इनबॉक्स करे।

मुझे लगता है की चूंकि " वैदिक" शब्द  बेहद आकर्षक है इसलिए इसे "वैदिक गणित" का नाम दिया गया होगा।कुछ रिसर्च पेपर तो दावा करते हैं की "वैदिक गणित "में न तो वेद हैं न गणित है।

अब तक मुझे जो समझ आया वो ये है की "वैदिक गणित" छोटा मोटा अंक गणित ही है।छोटे मोटे सूत्र हैं जोड़, गुणा,घटाने के।पुस्तक में करीब 40 अध्याय है।16 सूत्र,16 उप सूत्र,13 नियम और 13 उपनियम हैं।

गणित बहुआयामी भाषा है।वो भाषा जिस से आप प्रकृति से बात करते हैं।गणित विज्ञान के विभिन्न आयामों को बड़े ही सूक्ष्म स्तर पर समझाता है। मैं भौतिक विज्ञान का छात्र और प्राध्यापक हूं।मेरा यकीन मानिए ,भौतिक विज्ञान की वास्तविक परिभाषा ," गणित की सहायता से प्रकृति को समझना" ही है।

टाटा इंस्टीट्यूट ,मुंबई के प्रोफेसर "एस जी दानी" और अन्य गणितज्ञों का खोज पत्र जो उन्होंने भारत सरकार को सौंपा था, इंटरनेट पर उलब्ध है।इस रिसर्च पेपर में उन्होंने लिखा की वैदिक मैथमेटिक्स छात्रों के मूलभूत गणितकिय समझ को बर्बाद कर देगा।जो समय गणित की समझ में छात्रों का लगना चाहिए वो वैदिक मैथमेटिक्स के सूत्रों में बर्बाद हो जाएगा।गणित मात्र जोड़ना घटाना नहीं है।ये बड़ा विस्तृत विज्ञान है।

इसी तरह के हजारों पत्र देश के वर्तमान गणितज्ञों ने भारत सरकार को लिखे जिस के कारण वैदिक गणित स्कूल क्यूरिकल्म का हिस्सा नहीं बन पाया।

संकीर्ण राष्ट्रवाद दरअसल धार्मिक प्रतीकों के बहाने सारे ज्ञान विज्ञान पर अपनी पकड़ ,अपना नियंत्रण रखना चाहता है।इस से धर्मगुरुओं को समाज पर अपना नियंत्रण रखने का अवसर भी स्वतः मिल जाता है ।संकीर्ण राष्ट्रवाद की एक समस्या ये भी है की वो अपनी सारी समस्याओं का हल अपने तथाकथित स्वर्णिम इतिहास में ढूंढता है।ये भी मत भूलिए की"ज्ञान" की अपनी एक राजनीति भी होती है।

ऐसा सिर्फ भारत में नहीं है।पाकिस्तान में जब बिजली संकट पर पाकिस्तान सरकार ने एक कॉन्फ्रेंस आयोजित की तो उसमे एक बड़ा मजेदार रिसर्च पेपर पढ़ा गया।रिसर्च पेपर में दावा किया गया की ," हमारी धार्मिक पुस्तकों में "जिन्न" का बहुत बड़ा उल्लेख है।सरकार को "जिन्न" पर रिसर्च करवानी चाहिए ताकि पाकिस्तान में बिजली का हल" जिन्न " निकाल पाएं।

भारत ने निसंदेह गणित के क्षेत्र में महान योगदान दिया है।वैदिक समय में भी  गणित का जबरदस्त विकास हुआ।सिर्फ आर्यभट की " शून्य " ही नहीं उस से पहले भी एस्ट्रोनॉमिकल गणित,भास्कर और उनके सहयोगियों ने गणित विकास में जो योगदान दिया है उसका असर माडर्न विज्ञान में देखा जा सकता है। इंडो अरेबिक न्यूमेरल सिस्टम में अरेबिक बहुत बाद में जुड़ा ,वास्तव में ये भारतीय खोज है जिसे अरबियों ने अपनाया और दुनिया भर में लोकप्रिय और मान्यताप्राप्त करवाया।

याद रखिए,गणित केवल नौ गुना चार बराबर छत्तीस नहीं है।

भारत में गणित की  उच्च शिक्षा की जो सबसे बड़ी संस्था है वो एटॉमिक एनर्जी कमीशन के अंतर्गत आती है।यहीं से समझिए ,गणित की विज्ञान के हर आयाम जैसे न्यूक्लियर फिजिक्स, एस्ट्रोनॉटिकल फिजिक्स,सिविल इंजीनियरिंग और अन्य में विभिन्न प्रकार की अद्वितीय दखल है।

गणित का आधार सीखिए।कक्षा दसवीं तक जितना भी गणित  एनसीईआरटी की किताबों में सिखाया जाता उसमे पारंगत हो जाइए। रटत विद्या का कोई विशेष लाभ होता नहीं है।

सचिन ठाकुर,

पर्वक्ता :भौतिक शास्त्र

राजकीय उच्च शिक्षा विभाग,

हिमाचल सरकार।

9418201289